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प्रतिदिन एक प्रश्न - 01 अगस्त 2026

எழுதியவர் அறிவுப்பசி · தினம் 4· 1 ஆகஸ்ட், 2026· 2 நிமிட வாசிப்புTranslated · HI
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தினம் ஒரு வினா - 01 ஆகஸ்ட் 2026
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### तिरुक्कुरल की रचना किसने की? - **A.** तिरुवल्लुवर - **B.** कंबन - **C.** इलंगो अडिगल - **D.** भारती **सही उत्तर:** A **व्याख्या:** तिरुक्कुरल की रचना तिरुवल्लुवर ने की। वे एक महान विद्वान-कवि थे जिन्होंने तमिल की गरिमा को विश्व के सामने स्थापित किया। **Deutsch:** तिरुक्कुरल के कवि तिरुवल्लुवर हैं। ## प्रश्न का उद्देश्य: तमिल साहित्य के मूलभूत ज्ञान की पुष्टि करना “तिरुक्कुरल की रचना किसने की?”—यह प्रश्न तमिल भाषा के आधारभूत साहित्यिक ज्ञान के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रवेश-द्वार जैसा माना जा सकता है। विद्यालय की पाठ्यपुस्तकों से लेकर सामान्य परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं तक, तिरुक्कुरल और उसके लेखक से जुड़े प्रश्न लगातार शामिल होते रहते हैं। यह उस ग्रंथ के तमिल समाज में स्थान को और उसके विचारों में निहित सार्वजनहितकारी प्रकृति को दर्शाता है। यहाँ दिए गए चारों विकल्पों (तिरुवल्लुवर, कंबन, इलंगो अडिगल, भारती) में तमिल की शास्त्रीय साहित्य-परंपरा के ऐसे रचनाकार शामिल हैं, जिनका साहित्य-इतिहास में अलग-अलग विशिष्ट स्थान है। इसलिए यह प्रश्न केवल “तिरुक्कुरल किसका है?” जैसी सूचना भर नहीं, बल्कि तमिल के प्रमुख ग्रंथों को उनके रचयिताओं के साथ जोड़कर पहचानने की क्षमता की भी जाँच करता है। ## सही उत्तर: तिरुवल्लुवर दिए गए विकल्पों में **A. तिरुवल्लुवर** ही सही उत्तर है। **तिरुक्कुरल की रचना तिरुवल्लुवर ने की**—यह तमिल साहित्य-जगत में व्यापक रूप से स्वीकार की गई पहचान है। यह ग्रंथ “तिरुक्कुरल” नाम से विख्यात है, और इसके रचयिता तिरुवल्लुवर का नाम भी तमिल सांस्कृतिक स्मृति में गहराई से अंकित है। **व्याख्या** में कही गई तरह, तिरुवल्लुवर को “तमिल की गरिमा को विश्व के सामने स्थापित करने वाले महान विद्वान” कहना तिरुक्कुरल की व्यापक ख्याति और उसके विचारों द्वारा मानव जीवन के अनेक पक्षों को समेटने वाली प्रकृति के अनुरूप है। तिरुक्कुरल केवल एक धर्म/नीति-ग्रंथ नहीं है; बल्कि जीवन-आचरण, सामाजिक संबंध, व्यक्ति की जिम्मेदारी जैसे अनेक आयामों को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करने वाला ग्रंथ है—इसी कारण इसे बहुत-से लोग अत्यंत मान देते हैं। ## अन्य विकल्प सही क्यों नहीं हैं? इस प्रश्न में दिए गए बाकी तीनों विकल्प तमिल साहित्य की महानताओं की याद दिलाने वाले नाम हैं, लेकिन **तिरुक्कुरल के लेखक** के संदर्भ में वे सही नहीं हैं। ### कंबन (B) **कंबन** तमिल साहित्य में अत्यंत प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी प्रमुख रचना “कंबरामायणम्” के नाम से जानी जाती है। इसलिए तमिल के लिए उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है, पर “तिरुक्कुरल” को कंबन द्वारा रचित कहना गलत है। ### इलंगो अडिगल (C) **इलंगो अडिगल** तमिल साहित्य में “शिलप्पदिकारम्” से जुड़े नाम के रूप में याद आते हैं। वे महान महाकाव्य-परंपरा से संबंधित हैं, इसलिए साहित्यिक प्रश्नों में उनका नाम अक्सर आता है। लेकिन तिरुक्कुरल के रचयिता वे नहीं हैं। ### भारती (D) **भारती** (भारतीयार) तमिल की नई कविता-आंदोलन और सामाजिक-राष्ट्रीय जागरण के प्रतीक माने जाते हैं। उनके गीत आज भी लोगों के बीच जीवंत हैं। फिर भी, तिरुक्कुरल उनकी रचना नहीं है; तिरुक्कुरल अत्यंत प्राचीन साहित्य-परंपरा का हिस्सा माना जाता है—और भारती का काल तथा साहित्यिक संदर्भ अलग है। ## तिरुक्कुरल: एक ग्रंथ नहीं, एक दीर्घकालिक संवाद तिरुक्कुरल पर बात करते हुए यह समझा जा सकता है कि वह “दिन का एक प्रश्न” जैसे शृंखलाओं में बार-बार क्यों आता है। कारण यह है कि इस ग्रंथ को जीवन के लिए आवश्यक मूलभूत मूल्यों और व्यावहारिक विचारों को संक्षेप में व्यक्त करने वाला माना जाता है। केवल तमिल पाठक ही नहीं, अनेक भाषाओं के पाठक भी इस ग्रंथ की विचार-समृद्धि को महत्व देते हैं—यह दृष्टि व्यापक रूप से प्रचलित है। उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को सत्यनिष्ठा, अनुशासन, जिम्मेदारी जैसे गुणों के बारे में मार्गदर्शन देना हो, तो संक्षिप्त “कुरल” रूप वाले विचार “नीति-वाक्य” की तरह जगह बना लेते हैं। इसी तरह परिवार-सम्बंध, समाज में आचरण, विनम्रता जैसे विषयों पर बात करते समय भी तिरुक्कुरल का स्मरण होना सामान्य है। ## लेखक की पहचान: भाषा-सांस्कृतिक स्मृति का एक हिस्सा “तिरुक्कुरल की रचना तिरुवल्लुवर ने की”—यह सूचना केवल सामान्य जानकारी भर नहीं रह जाती। यह तमिल सांस्कृतिक संदर्भ में एक पहचान-चिह्न (identity marker) के रूप में भी काम करती है। किसी समाज में महत्वपूर्ण ग्रंथ किसने लिखे—यह उस समाज की शैक्षिक परंपरा और स्मृति-निर्माण को दर्शाता है। इसी कारण प्रतियोगी परीक्षाओं या सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी में “तिरुक्कुरल — तिरुवल्लुवर”, “कंबरामायणम् — कंबन”, “शिलप्पदिकारम् — इलंगो अडिगल”, “नई कविता/देशभक्ति गीत — भारती” जैसे जोड़े बार-बार पूछे जाते हैं। इस तरह लेखक-ग्रंथ संबंध को स्पष्ट रूप से जानना तमिल साहित्य-इतिहास को व्यवस्थित ढंग से समझने का एक मूलभूत अभ्यास भी है। ## जर्मन पंक्ति (Deutsch): भाषाओं के बीच कथन का एक छोटा संकेत लेख में जो जर्मन पंक्ति जोड़ी गई है: **“Der Dichter des Tirukkural ist Tiruvalluvar.”** — इसका अर्थ है कि तिरुक्कुरल के कवि/रचयिता तिरुवल्लुवर हैं। तमिल समाचार/ज्ञान शृंखलाओं में इस तरह का बहुभाषिक संदर्भ शामिल होना, जानकारी को अनेक भाषाओं के पाठकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। विशेषकर, तमिल साहित्य के आधारभूत परिचयों को वैश्विक बनाने की दृष्टि से ऐसे एक-वाक्यीय स्पष्टीकरण भी उपयोगी हो सकते हैं। ## निष्कर्ष: “दिन का एक प्रश्न” जैसे प्रारूप का लाभ यह “दिन का एक प्रश्न - 01 अगस्त 2026” जैसा प्रारूप दैनिक अध्ययन में कम मात्रा में, लेकिन स्पष्ट ज्ञान सुनिश्चित करने में सहायक हो सकता है। इस प्रकार के प्रश्न, “एक दिन—एक जानकारी” की सरल विधि से, तमिल साहित्य की प्रमुख पहचानें और सामान्य तथ्य पाठकों की स्मृति में स्थिर करने का काम करते हैं। इस प्रश्न का मूल संदेश स्पष्ट है: **तिरुक्कुरल की रचना तिरुवल्लुवर ने की**। इसे सुनिश्चित कर लेना तमिल के प्रमुख साहित्यिक धरोहर को जानने के शुरुआती कदमों में से एक है।

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