4 अक्षरी डीएनए से 8 अक्षरी डीएनए तक – वैज्ञानिकों की नई उपलब्धि
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10 पुरट्टासी 2026
परिचय
पृथ्वी पर बैक्टीरिया से लेकर नीली व्हेल तक, सभी ज्ञात जीव एक ही चार-अक्षरी आनुवंशिक भाषा (Genetic Alphabet) का उपयोग करते हैं—एडेनिन (A), थाइमिन (T), साइटोसिन (C), गुआनिन (G) ये ही वे चार अक्षर हैं। ये DNA की द्वि-सर्पिल संरचना में एक विशिष्ट तरीके से जुड़कर, जीवों की आनुवंशिक जानकारी को संचित करते हैं और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। अब, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इस “सार्वभौमिक” आनुवंशिक भाषा को दोगुना करके, आठ अक्षरों वाली एक विस्तारित भाषा को कोशिकाओं की प्राकृतिक मशीनरी स्वयं सटीक रूप से पढ़ सकती है। 2 सितंबर, 2026 को “नेचर कम्युनिकेशन्स” (Nature Communications) पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन, कृत्रिम जीवविज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
खोज का विवरण
UC सैन डिएगो के स्कैग्स स्कूल ऑफ फ़ार्मेसी से प्रोफेसर टोंग वांग के नेतृत्व में शोध दल ने इस अध्ययन को “आर.एन.ए. पॉलिमरेज़” (RNA Polymerase) नामक अत्यंत महत्वपूर्ण कोशिकीय एंज़ाइम को केंद्र में रखकर किया। यह एंज़ाइम DNA को पढ़कर RNA का निर्माण करता है—यह जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) का पहला चरण है। शोध दल ने “क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी” (Cryo-Electron Microscopy) नामक अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक का उपयोग करके, एक परमाणु की चौड़ाई से भी छोटे पैमाने पर इस एंज़ाइम की क्रियाशीलता को चित्रित किया।
“हाचिमोजी” आठ-अक्षरी भाषा
इस अध्ययन में प्रयुक्त विस्तारित आनुवंशिक भाषा को “हाचिमोजी” (Hachimoji) कहा जाता है—जापानी भाषा में जिसका अर्थ “आठ अक्षर” होता है। यह शब्द एक ऐसी प्रणाली को दर्शाता है जिसमें चार प्राकृतिक अक्षरों के साथ चार कृत्रिम रूप से बनाए गए नए DNA अक्षर जोड़े गए हैं। शोध दल ने पाया कि E. coli बैक्टीरिया का RNA पॉलिमरेज़ एंज़ाइम इन नए अक्षरों को भी उसी तरीके से सटीक रूप से पहचानकर संसाधित करता है, जैसे वह प्राकृतिक अक्षरों को पहचानता है।
यह खोज महत्वपूर्ण क्यों है?
पहले भी वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में कृत्रिम DNA अक्षर बना चुके थे। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि क्या कोशिकाओं की प्राकृतिक मशीनरी (DNA की प्रतिलिपि बनाने और पढ़ने वाले एंज़ाइम) इन नए अक्षरों को सही ढंग से संसाधित कर पाएगी। यदि ये एंज़ाइम नए अक्षरों पर अटक जाएँ, तो आनुवंशिक जानकारी में त्रुटियाँ हो सकती हैं। यह नया अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि एक प्रमुख प्राकृतिक एंज़ाइम—बिना किसी पुनर्रचना (री-इंजीनियरिंग) के—इन नए अक्षरों को सटीक रूप से संसाधित कर सकता है। यह इस बात का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है कि कोशिकाओं को पूरी तरह से पुनःडिज़ाइन किए बिना भी विस्तारित आनुवंशिक जानकारी का प्रसंस्करण संभव है।
हाइड्रोजन बंधन के बिना भी कार्य
इसी शोध दल ने 12 अगस्त, 2026 को “PNAS” (Proceedings of the National Academy of Sciences) में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में एक और अधिक आश्चर्यजनक खोज प्रस्तुत की—RNA पॉलिमरेज़ एंज़ाइम हाइड्रोजन बंधन रहित एक कृत्रिम DNA अक्षर-युग्म को भी पहचानकर संसाधित कर सका। सामान्यतः, DNA की दोनों धाराओं को साथ बांधे रखने में हाइड्रोजन बंधनों को अनिवार्य माना जाता है; इसलिए इन बंधनों के बिना भी एंज़ाइम का काम करना, आनुवंशिकी की बुनियादी समझ के लिए नए प्रश्न खड़े करता है।
व्यावहारिक उपयोग
यह खोज केवल बुनियादी वैज्ञानिक जिज्ञासा तक सीमित नहीं है—शोधकर्ताओं का विश्वास है कि यह कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुप्रयोगों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। पहले, विस्तारित आनुवंशिक भाषाओं का उपयोग करके ऐसे कृत्रिम DNA अणु बनाए जा चुके हैं जो यकृत कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकते हैं। RNA पॉलिमरेज़ इन कृत्रिम अक्षरों को कैसे सटीक रूप से पढ़ता है, इसे समझना नए निदान उपकरण (Diagnostics), उपचार विधियाँ (Therapeutics), और प्रकृति में न पाई जाने वाली नई क्षमताएँ निभा सकने वाली अभियांत्रिक जैविक प्रणालियाँ (Engineered Biological Systems) विकसित करने के लिए आणविक आधार प्रदान करता है।
कृत्रिम जीवविज्ञान का दीर्घकालिक लक्ष्य
DNA भाषा का विस्तार करना, कृत्रिम जीवविज्ञान (Synthetic Biology) के दीर्घकालिक लक्ष्यों में से एक है। यदि अभियांत्रिकी के माध्यम से ऐसे जीव बनाए जा सकें जो प्रकृति में न मिलने वाले नए अमीनो अम्लों का उत्पादन कर सकें, या नई कार्यक्षमताएँ निभा सकें, तो इससे चिकित्सा, कृषि और उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, नए प्रकार के प्रोटीन बनाने वाले सूक्ष्मजीव, या प्रकृति में न मिलने वाले औषधीय घटक उत्पन्न करने वाली कोशिकीय प्रणालियाँ विकसित की जा सकती हैं।
वैज्ञानिक समुदाय का सतर्क स्वागत
हालाँकि इस खोज की व्यापक सराहना हुई है, फिर भी वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति के हिस्से के रूप में स्वतंत्र शोधकर्ता इन निष्कर्षों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के माध्यम से आणविक संरचना का प्रत्यक्ष चित्रण, पहले उपलब्ध अप्रत्यक्ष प्रमाणों (जैसे त्रुटि दर) की तुलना में कहीं अधिक ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य माना जाता है।
निष्कर्ष
जीवों की मूल आनुवंशिक भाषा का विस्तार करने वाली यह खोज, जीवविज्ञान की सीमाओं को नई दिशाओं में फैलाती है। चार अक्षरों से आठ अक्षरों तक आनुवंशिक भाषा को विस्तारित करने की यह क्षमता भविष्य में चिकित्सा, निदान, और अभियांत्रिक जीवविज्ञान में क्रांतिकारी प्रगति का बीज बो सकती है। यह एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्याय है, जो यह सिद्ध करता है कि जीवन की मूल भाषा स्वयं मानव द्वारा अद्यतन किए जाने योग्य एक प्रणाली है।
प्रकाशन: Arivuppasi Media ஆதாரங்கள்
- 1.UC San Diego TodayUC San Diego Today · 2026-09-02 · இணையதளம்ஆதாரத்தைப் பார்க்க
- 2.ScienceDailyScienceDaily · 2026-09-02 · இணையதளம்ஆதாரத்தைப் பார்க்க
- 3.Nature CommunicationsNature Communications · 2026-09-02 · இணையதளம்ஆதாரத்தைப் பார்க்க
- 4.Phys.orgPhys.org · இணையதளம்
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